कभी तो पहल करनी ही पड़ती

जाने कब से ये कसमसाहट सी थी… लेकिन येनकेन वजहों से भड़ास दिल में ही दबी रह जाती थी… और फिर जिंदगी का सफर यूं ही चलता रहा… लेकिन गुबार निकालने की ये पहल तो कभी न कभी करनी ही थी… सो कर दी… सीधी बात करने ही जुर्रत हमेशा से रही है जो अब मेरी आदत में शुमार है… इसलिए इस मंच का नाम भी वही रख दिया… सीधी बात…. हां ये और बात है कि सच का स्वाद थोड़ा कड़वा जरूर होता है…. लेकिन क्या करूं… खैर मुझे तो इसकी आदत है… अब आप लोग भी इसकी आदत बना ले तो आपको भी आनंद आएगा और जिन आदरणीय लोगों को इससे तकलीफ है वो भी अपनी भड़ास निकालने के लिए आजाद हैं… आखिरकार हम आजाद देश के नागरिक जो हैं…

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One Response to “कभी तो पहल करनी ही पड़ती”

  1. pragya Says:

    स्वागत है…

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