
धरती की गोद में
फिर एक कोंपल निकलना चाहता है
उसे नहीं मालूम कि कई घने पेड़
उसे धूप तक मयस्सर नहीं होने देंगे
जमीन की नमी को सोख लेंगे
मीलों तक जड़ों को फैलाकर
इलाके पर अपना वर्चस्व बताएंगे
फिर भी कोंपल जन्म लेना चाहता है
अपनी जमीन, अपना आसमान चाहता है
झाड़ और सूखे पत्तों के बीच कुछ बची नमी
और झुरमुटों के बीच से आती धूप से
एक दिन पेड़ बनने की ख्वाईश रखता है
कोंपल जो बड़ा होकर, लोगों को छांव देगा
जिस धरती से फूटा है, उसे टिकने का ठांव देगा
फलों-फूलों-सुगंध से जीवन का संचार देगा
परिदों को घोंसला और हमें जीवन का सार देगा।
तकनीक ने हमारी ज़िंदगी को बहुत आसान बना दिया है, लेकिन इसके दुरुपयोग ने मानो जीना मुहाल कर दिया है। अब उदाहरण तो ढेरों पड़े हैं, आपने भी इसे अक्सर महसूस किया होगा। अब कुछ दिनों पहले की ही बात है… मुझे पता चला कि किसी ने मेरे अजीज की क्रेडिट कार्ड से हजारों की हेराफेरी कर दी। अब बात यहीं तो ख़त्म होती नहीं। एक तो अचानक रुपए गायब हो जाएं तो बजट और सारी योजनाएं ही गड़बड़ हो जाती है उपर से बैंक इसके भुगतान का भी दबाव डालता है, यानी दोहरी मार झेलनी पड़ती है। फिर पुलिस… शिकायत.. दौड़धूप… मानसिक और शारीरिक परेशानी सो अलग। ख़ैर… मेरे हिसाब से किसी फ़र्ज़ीवाड़े से बचने का सबसे अच्छा तरीका है उसके तरीके को समझना और खामियों को जानना। तो लीजिए मैं आपको बताता हूं कि आप अपने क्रेडिट कार्ड कैसे हिफाजत से रखे ताकि कोई आपके इलेक्ट्रॉनिक पॉकेट में हाईटेक सेंधमारी न कर सके। इस फ़र्जीवाड़े का सबसे आसान तरीका है आपके पहचान की चोरी करने के बाद उसका इस्तेमाल। मसलन कार्ड धारक का नाम, अकाउंट नंबर, कार्ड की वैधता या ऐसी ही कुछ और जानकारी के जरिए फ़र्जीवाड़ा। इससे बचने के लिए न तो अपने कार्ड की जानकारी किसी को बताएं और न ही किसी ऐरेगैरे वेबसाइट पर इसे दें। क्रेडिट कार्ड फ़र्जीवाड़े का एक और तरीका है स्किमिंग। इसमें शातिर लोग खरीदारी के वक्त आपके कार्ड को स्वैप करते समय एक छोटे से इलेक्ट्रॉनिक उपकरण(स्किमर) में कार्ड के मैगनेटिक डैटा को चुरा लेता है। इसके बाद आपके कार्ड का हमशक्ल तैयार किया जाता है और फिर आप तो समझ ही रहे होंगे। इस धोखाधडी़ से बचने के लिए हमेशा प्रमाणित दुकानों से ही खरीदारी करें और अपने सामने ही कार्ड स्वैप कराएं। और कभी भी थोड़ी सी भी हेरफेर या संदेह होने पर बैंक और पुलिस को जरूर बताएं। यानी कुल मिलाकर यही है कि साहब सावधानी गई और दुर्घटना हुई इसलिए तो कह रहा हूं कि क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल तो जमकर करें लेकिन बाबू जरा संभल के।
आम दिनों की तरह मेरी नींद आज भी देर से खुली और हर रोज की तरह अधखुली पलकों से कमरे के बाहर पड़ा अख़बार उठाया और टीवी पर ज़ी न्यूज़ खोलकर निगाहें जमाने की कोशिश करने लगा। जैसे ही मेरी नज़र नीचे चल रही पट्टी पर गई तो मेरी आंखे खुली की खुली रह गई। एक युग पुरुष हमेशा के लिए मौन हो गए। प्रभाष जोशी जी नहीं रहे या यूं कहें कि एक युग का अंत हो गया। रहे। 72 साल की ही उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। गुरुवार की रात भारत-ऑस्ट्रेलिया मैच के बाद करीब 11:30 बजे उन्होंने सीने में दर्द की शिकायत की। जिसके तुरंत बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया और वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। हिन्दी भाषा और साहित्य के विकास में योगदान के लिए उनको साल 2007-08 का शलाका सम्मान दिया गया था। आज के पत्रकारों की फौज में मेरे जैसे जाने कितने होंगे जो उन्हें प्रेरणा के तौर पर मानते होंगे। पत्रकारिता की क…ख…ग… सीखने को दौरान इनके अग्रलेखों को नज़ीर की तरह पढ़ाया जाता था। हमारे बीच से उनका अचानक यूं चले जाना… एक पल को तो आंखों पर भरोसा ही नहीं हुआ। लेकिन सच कहें तो वो आज भी हमारे बीच हैं… उनकी लेखनी… उनकी अमर कृतियां हमेशा उनके साथ का एहसास दिलाती रहेगी।